मंत्रालय में वरिष्ठ नागरिकों के साथ हो रही उपेक्षा तत्काल बंद हो,प्रवेश व्यवस्था में सुधार एवं समय-सीमा विस्तार की मांग

रायपुर—- भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने मंत्रालय रायपुर में प्रवेश व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स को हो रही गंभीर असुविधाओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग को संयुक्त ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

महासंघ ने कहा है कि मंत्रालय में प्रवेश पत्र (पास) बनाने का समय केवल दोपहर 2:30 बजे से 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, जो व्यवहारिक नहीं है। दूरस्थ क्षेत्रों से लगभग 25 किलोमीटर की यात्रा कर आने वाले वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनर्स एवं पारिवारिक पेंशनर्स के लिए इस सीमित अवधि में प्रवेश पत्र बनवाकर संबंधित विभाग तक पहुंचना अत्यंत कठिन एवं कष्टप्रद हो जाता है।
प्रवेश पत्र निर्माण हेतु मात्र एक ही काउंटर संचालित होने से वृद्धजन, महिलाएं एवं दिव्यांगजन लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर होते हैं। मंत्रालय परिसर में बैठने की समुचित व्यवस्था का अभाव स्थिति को और भी दयनीय बना रहा है। महासंघ ने इसे वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा के प्रतिकूल बताया है।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 5 फरवरी 2026 को जारी निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार एवं बुधवार को अधिकारीगण जनता की समस्याओं के निराकरण हेतु कार्यालय में उपस्थित रहते हैं। ऐसी स्थिति में कम से कम इन दो दिनों में प्रवेश प्रक्रिया प्रातः 10:00 बजे से प्रारंभ की जानी चाहिए तथा वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स के लिए पृथक काउंटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
महासंघ की प्रमुख मांगें निम्नानुसार हैं —
वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स हेतु पृथक प्रवेश काउंटर की स्थापना।
प्रवेश पत्र निर्माण की समय-सीमा का विस्तार कर प्रातः 10:00 बजे से प्रारंभ करना।
मंत्रालय परिसर में बैठने एवं छाया की समुचित व्यवस्था।
प्रवेश प्रक्रिया को सरल, मानवीय एवं संवेदनशील बनाना।

महासंघ के प्रमुख पदाधिकारी क्रमशः वीरेन्द्र नामदेव , जे पी मिश्रा , अनिल गोल्हानी, टी पी सिंह, बी एस दसमेर, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, आर जी बोहरे, ओ डी शर्मा, अनिल पाठक आदि ने कहा है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने को बाध्य होगा।

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