बिलासपुर — छत्तीसगढ़ के अति-दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ में पहली बार मोबाइल टावर लगने के साथ वर्षों से पसरा सन्नाटा टूटा है। संचार व्यवस्था की यह ऐतिहासिक शुरुआत न केवल तकनीकी पहुंच बढ़ा रही है, बल्कि यहां के ग्रामीणों को राज्य की मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन रही है।
दुर्गम बस्तियों में विकास की नई कहानी
बस्तर संभाग के शुरुआती और पिछड़े गांवों में अब प्रशासन की पहुंच लगातार बढ़ रही है। बस्तर के दुर्गम इलाकों में सड़क, संचार और सेवा वितरण व्यवस्थाओं के साथ विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।
बीजापुर—पम्मीर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएँ पहुँचीं
बीजापुर के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र पम्मीर में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
यहाँ 3500 से अधिक लोग अब बैंकिंग सेवाओं से जुड़े हैं, जिससे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुँच रहा है।
इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।

नारा भी गूंज रहा है—“सांवर रहा है बस्तर, सांवर रहा है छत्तीसगढ़।”
जवानों और वीर परिवारों का सम्मान—सुशासन सरकार की नई पहचान
राज्य सरकार ने राष्ट्र सेवा में समर्पित जवानों, पूर्व सैनिकों और शहीद जवानों की वीरांगनाओं के सम्मान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
अब पूर्व सैनिक, सेवारत सैनिक और वीरांगनाएँ 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क में 25% की छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगी।
यह निर्णय उनके योगदान के प्रति सरकार की कृतज्ञता को प्रकट करता है और उन्हें आर्थिक समर्थन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मोबाइल नेटवर्क, बैंकिंग सेवाओं, सड़क संपर्क और पारदर्शी शासन ने वह किया है जो वर्षों से असंभव माना जाता था।
अबूझमाड़ से लेकर पम्मीर तक—दुर्गम ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है।
यह सुशासन सरकार के संकल्प, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि का प्रमाण है, जो विकास को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए समर्पित है।
इन सभी बातों के लिए और राज्य के बेहतर विकास के लिए भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा सोशल मीडिया प्रभारी अभिषेक घोरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बहुत-बहुत धन्यवाद कहा


