सफलता की कहानी,बिहान योजना से आत्मनिर्भरता बन लखपति दीदी की ओर बढ़े तेजश्री के कदम

बिलासपुर, 27 मई 2026/बिल्हा ब्लॉक के ग्राम महमंद की तेज श्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पहले सीमित संसाधनों के साथ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली तेजश्री ने बिहान योजना से जुड़कर आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।
बिल्हा ब्लॉक के ग्राम महमंद की तेजश्री का जीवन संघर्षों और उसके बाद मिली सफलता की बड़ी मिसाल है। विवाह के कुछ वर्षों बाद ही एक बेटे को लेकर परित्यक्ता का जीवन जी रही तेजश्री के लिए अकेले बेटे की परवरिश करना एक बड़ी चुनौती थी लेकिन बिहान योजना से जुड़कर मिले संबल ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। साईं बाबा स्व सहायता महिला समूह से जुड़कर उन्होंने महिला उद्यमी के रूप में ऋण के लिए आवेदन किया। जिसके तहत एक लाख बीस हजार रुपये का ऋण आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद समय पर स्वीकृत होकर उन्हें मिल गया। इस आर्थिक सहयोग ने उनके लिए स्वरोजगार की राह खोली और उन्होंने अपने घर के पास ही एक छोटी दुकान की शुरुआत की। इस दुकान में उन्होंने सिलाई कार्य को व्यवसाय के रूप में प्रारंभ किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित स्तर पर काम किया, लेकिन धीरे-धीरे इसे व्यवस्थित रूप दिया। इसी दौरान उन्होंने आरसेटी से सिलाई का निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उनके कौशल में और सुधार हुआ तथा कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। तेजश्री ने अपनी दुकान को केवल सिलाई कार्य तक सीमित न रखते हुए उसमें सिलाई से संबंधित आवश्यक सामग्री जैसे कपड़े, धागा, बटन एवं अन्य सामान भी रखना शुरू किया। इससे ग्राहकों को एक ही स्थान पर सुविधा मिलने लगी और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं रही। इस व्यवस्था ने उनके व्यवसाय को और अधिक उपयोगी और व्यवहारिक बना दिया। समय के साथ उनके काम की गुणवत्ता, नियमितता और ग्राहकों के साथ अच्छे व्यवहार के कारण उनकी दुकान पर आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई। सिलाई कराने आने वाले ग्राहक अब आवश्यक सामग्री भी वहीं से खरीदने लगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होने लगी।
वर्तमान में तेजश्री लगभग 15,000 रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं और अपने बेटे को बेहतर शिक्षा और परवरिश दे रही हैं अब वह आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ “लखपति दीदी” बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरक है।

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