राष्ट्रीय संगीत, नृत्य एवं कला की अनूठी संगम स्थली बना बिलासपुर


बिलासपुर। कला, संस्कृति और संगीत के रंगों से सराबोर वातावरण के बीच देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तरीय चार दिवसीय “नाद मंजरी सीजन-3” प्रतियोगिता का गुरुवार, 26 जून को भव्य शुभारंभ कृषि महाविद्यालय ऑडिटोरियम में हुआ हुआ। कार्यक्रम के पहले ही दिन देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से दर्शकों और निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रतियोगिता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मंच पर 5 वर्ष के नन्हे प्रतिभागियों से लेकर 74 वर्ष के वरिष्ठ कलाकारों तक ने अपनी-अपनी कला विधाओं का शानदार प्रदर्शन कर यह संदेश दिया कि कला की कोई उम्र नहीं होती।

संगीत, नृत्य, वादन, ड्राइंग एवं पेंटिंग सहित विभिन्न विधाओं में करीब 150 प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शिव शक्ति, रायगढ़ के चक्रधर कला संगीत महाविद्यालय, नृत्य गुरु प्रति गोस्वामी, गुरु वत्सला गुप्ता, सुशांत साहा, संगीत गुरु विपुला दास के विद्यार्थियों सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन थावे विद्यापीठ में कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक, न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण बाजपेयी, प्रसिद्ध कथक गुरु रिमझिम सोनी, वरिष्ठ संगीताचार्य रमाकांत त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर आयोजक पंकज खंडेलवाल, मयूरी खंडेलवाल, सुरेंद्र वर्मा, दीपक, तरुण मिश्रा सहित आयोजन समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि “नाद मंजरी” केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देशभर की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को एक मंच पर जोड़ने वाला राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ कलाकारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में देशभर से आए कलाकार विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता के आगामी चरणों में भी अनेक आकर्षक प्रस्तुतियां, निर्णायकों की विशेष कार्यशालाएं तथा सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।

“नाद मंजरी सीजन-3” का आगाज़ जिस उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में यह आयोजन राष्ट्रीय कला जगत का एक यादगार अध्याय बनने जा रहा है। मंच संचालन कृष्णा तिवारी ने किया।
इस प्रथम दिवस के कार्यक्रम में डॉ रमेश चंद्र श्रीवास्तव, श्री विष्णु कुमार तिवारी,डॉ गजेंद्र तिवारी, डॉ राघवेंद्र दुबे,श्री जलेश्वर शर्मा, अंकिता शर्मा, लोरी पांडेय,डॉ सत्यनारायण तिवारी, सहोरिक यादव,डॉ अंकुर शुक्ला, आदि वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित थे।

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