छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के दो साल बाद ही पार्टी के भीतर पहली बार सबसे बड़ा, खुला झगड़ा सामने आया है। छत्तीसगढ़ भाजपा के दिग्गज नेता और रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है
बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट में अपनी ही सरकार के खिलाफ एक याचिका भी दायर कर दी है ।
जिस मामले में बृजमोहन अग्रवाल अपनी ही सरकार के खिलाफ आक्रामक मुद्रा में मोर्चा संभाले हुए है उसका मंच सरकार या संगठन नहीं बल्कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी बन गया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक कनिष्ठ मंत्री गजेंद्र यादव को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहमति से राज्य स्काउट गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष बना दिया गया और इसी दौरान इस परिषद से जुड़े 15 करोड़ के एक टेंडर पर सवाल उठे। आरोप लगा कि काम हो गया,चेहरों से काम करवा लिया और फिर टेंडर किया गया।
अब बृजमोहन अग्रवाल ने हाई कोर्ट से प्रार्थना की है कि गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष के पद से हटाया जाए और 9 जनवरी से होने जा रही जंबूरी को स्थगित किया जाए।
इस मामले में बृजमोहन अग्रवाल जो राज्य स्काउट और गाइड परिषद के मनोनीत नहीं बल्कि पांच वर्षों के लिए निर्वाचित अध्यक्ष हैं दूसरी तरफ साय सरकार है जिसके स्कूल शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री के अनुमोदन से बृजमोहन अग्रवाल के सामने एक बेहद कनिष्ठ मंत्री गजेंद्र यादव को महज एक सरकारी आदेश से राज्य स्काउट–गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष बना दिया! जानकार इस नियुक्ति की वैधानिकता पर उंगली उठा रहे हैं।
लेकिन इस नियुक्ति के साथ ही जो बात सतह पर आई वो थी छत्तीसगढ़ भाजपा में पिछले दो वर्षों की सबसे बड़ी लड़ाई।
इस पूरे मामले को समझिए।
रोवर–रेंजर जंबूरी एक ऐसा आयोजन है, जो सामान्यतः विवादों से दूर रहता है।
लेकिन इस बार आयोजन स्थल अचानक ही नया रायपुर से बदल बदल कर बालोद कर दिया गया।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि अब पार्टी के भीतर एक ऐसे बड़े झगड़े का रूप ले चुकी है जिसमें भाजपा सरकार को उसके ही एक वरिष्ठ सांसद ने भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपों पर कठघरे में खड़ा कर दिया जो दस्तावेजों से लेकर मैदान तक सामने साफ नजर आ रहा है।
एक अधिकारी के मुताबिक बालोद में इस जंबूरी के लिए बिना टेंडर के जेम पोर्टल के जरिए टेंट से लेकर खाने पीने के इंतजाम तक का सारा काम करवा दिया गया हुआ। जब भ्रष्टाचार की कहानियां सामने आने लगीं तो स्काउट गाइड की निर्वाचित परिषद यानि बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली परिषद ने इस जंबूरी को स्थगित करने का फैसला किया।
इधर यह फैसला हुआ उधर साय सरकार इसके खिलाफ मैदान में आ गई। सबसे पहले तो गजेंद्र यादव को प्रदेश स्काउट गाइड परिषद का मनोनीत पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति विष्णुदेव साय के अनुमोदन से हुई।
इसके बाद स्काउट गाइड कमिश्नर ने कहा जंबूरी स्थगित नहीं हुई है। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना आ गई । निर्वाचित अध्यक्ष के फैसले के विपरीत राज्य आयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि आयोजन होगा।
भ्रम इस बात को ले कर कि आयोजन होगा या नहीं।
आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की X पर पोस्ट आती है फिर उसे डिलीट कर दिया जाता है।
इस बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल दोहराते हैं कि वे राज्य स्काउट गाइड परिषद के विधिवत अध्यक्ष हैं।
इस पूरे विवाद पर द लेंस से बातचीत में बृजमोहन अग्रवाल ने बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, ‘पदेन अध्यक्ष की बात ही नहीं है। भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के छत्तीसगढ़ राज्य परिषद का अध्यक्ष मैं ही हूं। मैं निर्वाचित अध्यक्ष हूं और संगठन के संविधान के अनुसार मेरा कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। जब तक मैं स्वयं इस्तीफा नहीं दूंगा, तब तक मैं इस पद पर बना रहूंगा।’
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से 13 दिसंबर को यह आदेश जारी किया गया था कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पदेन अध्यक्ष होंगे।
भाजपा के सूत्रों के अनुसार गजेंद्र यादव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक बड़े पदाधिकारी के पुत्र हैं इस नाते सरकार में उन पर रोक टोक भी कम होती है।
बृजमोहन अग्रवाल ने इस विवाद के बीच स्काउट गाइड के एजेंडा क्रमांक 4 और रूल बुक के नियम 64.2 का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा और वह इस अवधि तक निरंतर पद पर रहेंगे।
यानी उनके मुताबिक संवैधानिक रूप से उनका अध्यक्ष बने रहना पूरी तरह वैध है।
बृजमोहन अग्रवाल गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आयोजन स्थगित करने की घोषणा कर देते हैं। वहीं सरकार आयोजन कराने को लेकर अडिग नजर आती है।
मामला इतना बढ़ गया है कि अब विपक्ष कांग्रेस को भाजपा पर सीधा हमला बोलने का खुला मौका मिल गया है।
मुख्यमंत्री की डिलीटेड पोस्ट: असमंजस का सबसे बड़ा संकेत
इस विवाद में सबसे अहम संकेत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के उस सोशल मीडिया पोस्ट से मिला, जिसे उन्होंने देर रात पोस्ट किया और कुछ समय बाद डिलीट भी कर दिया। मुख्यमंत्री ने लिखा था, ‘राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी का आयोजन और मेजबानी करना राज्य के लिए गर्व की बात है।’
लेकिन कुछ ही देर बाद यह पोस्ट हटा ली गई।
राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सवाल उठा रहा ही कि क्या मुख्यमंत्री को भी भ्रम में रखने की कोशिशें की गईं ? यदि ऐसा है तो क्या ऐसी कोशिश करने वाले लोग सरकार में ही बैठे हैं?
कांग्रेस का हमला: भाजपा में गुटबाजी उजागर
भाजपा की इस अंदरूनी लड़ाई पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘भाजपा अब एक पार्टी नहीं, बल्कि तीन गुटों में बंटी हुई है। पहला गुट शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का, दूसरा रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का और तीसरा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का।’
कांग्रेस का आरोप है कि पहले आयोजन नया रायपुर में होना था। लेकिन शिक्षा मंत्री ने इसे बालोद स्थानांतरित कर दिया, और इसी बदलाव के बाद वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप कर आयोजन रद्द करने की मांग तक कर दी है।
गजेंद्र यादव का पद अवैध : डॉ. राकेश गुप्ता
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि स्काउट–गाइड्स में उनका अध्यक्ष पद अवैध है। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और बालोद जिला कलेक्टर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल ने इस विवाद पर तंज कसते हुए कहा, ‘जंबूरी को लेकर सरकार खुद भ्रम में है।’
कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए EOW में शिकायत दर्ज कराई है और जल्द ही पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा।
5 हजार रेंजर रोवर पहुंचे आयोजन स्थल
स्काउट–गाइड्स के राज्य आयुक्त ने विज्ञप्ति जारी कर सभी आरोपों को खारिज किया है।
बालोद जिले के दुधली गांव स्थित आयोजन स्थल पर देशभर से 5 हजार से अधिक बच्चे पहुंच चुके हैं। आने वाले दिनों में करीब 8 हजार प्रतिभागियों और विदेशों से 500 मेहमानों के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों का साफ कहना है, ‘कार्यक्रम किसी भी हाल में स्थगित नहीं होगा।’
इस मामले में फिलहाल नजरें हाई कोर्ट पर हैं। बृजमोहन अग्रवाल की याचिका पर हाई कोर्ट के रुख से गजेंद्र यादव के स्काउट गाइड के पद और जंबूरी के आयोजन का भविष्य तय होगा।
इस याचिका में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पार्टी बनाया गया है लेकिन राजनीतिक तौर पर प्रदेश सरकार के लिए तो यह एक बड़ा झटका है जिसमें भाजपा के एक दिग्गज नेता अपनी ही सरकार भ्रष्टाचार के मामले में कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मामला भी दिल्ली तक पहुंचा है। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अभी तक पार्टी आलाकमान ने हस्तक्षेप नहीं किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार बृजमोहन अग्रवाल ने इस मुद्दे को उठाने से पहले पार्टी से लेकर सरकार तक सभी महत्वपूर्ण लोगों को अवगत करा दिया था।


