शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने पालकों के साथ जिला कलेक्टर से मुलाकात कर आत्मानंद स्कूल में बंद हो चुकी  नर्सरी, एलजी के विषय में चर्चा की


बिलासपुर के
आत्मानन्द स्कुलो में संचालित नर्सरी ,केजी ,एलकेजी को बन्द करने के सरकार के निर्णय से लगभग 300 बच्चों के भविष्य अधर में था ,उनके पालक भी चिंतित और परेशान हो रहे थे कि इन बच्चों के आगे की पढ़ाई का क्या होगा ?
इसको लेकर
शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने पालको के साथ ज़िला कलेक्टर से मुलाकात कर चर्चा की ,
जिला कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि नर्सरी ,केजी ,एलकेजी के बच्चे जिनका प्रवेश इस सत्र में हुआ है ,उनकी आगे भी पढ़ाई जारी रहेगी ,उन्हें अन्य स्कुलो में जाने की जरूरत नही है।

शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम फीस में गुणवत्तापूर्ण अच्छी शिक्षा देने के लिए आत्मानन्द स्कूल अंग्रेजी और हिंदी मीडियम में प्रारम्भ की ,जो ज़िला कलेक्टर के अधीन थे और उनका वेतन डीएमएफ मद से स्वीकृत की गई ,जिसके अंतर्गत तिलकनगर स्कूल,लाला लाजपत स्कूल,लालबहादुर स्कूल और तारबाहर स्कूल में नर्सरी, केजी,एलकेजी की कक्षाएं भी प्रारम्भ की गई ,किन्तु सत्ता परिवर्तन होते ही भाजपा सरकार ने इन स्कूलों को डीईओ के अधीन करके उनकी गुणवत्ता को खत्म करने की कोशिश की ,मिश्रा ने कहा कि नर्सरी ,केजी एलकेजी स्कुलो को बंद करने का निर्णय निजी स्कूल संचालको के सामने घुटने टेकने जैसा है, आत्मानन्द स्कूल खुलने से अभिभावक निजी स्कूलों की जगह आत्मानन्द में प्रवेश ले रहे थे और निजी संस्थाओ को आर्थिक हानि हो रही थी ,जबकि नर्सरी,केजी,एलकेजी के संचालन में आर्थिक बोझ बहुत कम है फिर भी भाजपा सरकार आर्थिक तंगी को कारण बताकर बन्द कर रही है ,
मिश्रा ने कहा कि ज़िला कलेक्टर से हमने मांग किया है कि नर्सरी ,केजी,एलकेजी की कक्षाएं आगे भी नियमित रुप से संचालित किया जाए ,छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओ की कमी नही है ,जरूरत है उन्हें अच्छी शिक्षा और दिशा की ,जिसके लिए आत्मानन्द स्कूल खोले गए और परिणाम भी अच्छे आ रहे है ,चूंकि सभी अभिभावक निजी स्कूलों में नही पढा सकते क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नही है ,कि निजी स्कूलों में पढ़ा सके ,जिससे उनकी प्रतिभा को दबाने की कोशिश की जा रही है ।
मिश्रा ने कहा कि
राज्य सरकार ने डीएमएफ मद से वेतन देने में असमर्थता बता रही है जबकि सत्य यह है कि बिलासपुर ज़िले में एसईसीएल ,एनटीपीसी जैसी केंद्रीय उपक्रम है साथ ही फैक्ट्री और कारखानो से ,खनिज संपदा से पर्याप्त रायल्टी मिलती है ,पर सरकार शिक्षा पर खर्च करना नही चाह रही है ,जबकि चार स्कूल में नर्सरी ,केजी ,एलकेजी के लिए मात्र 6 शिक्षक ही है ,किन्तु भाजपा सरकार नही चाहती कि गरीब एवं मध्यम वर्ग के बच्चो को अच्छी शिक्षा मिले, क्योकि इससे पूर्व भी सरकार ने लगभग 10 हजार से अधिक स्कुलो में तालाबंदी कर दी है जिससे बच्चे ,पालक परेशान हुएऔर बेरोजगारी भी बढ़ी पर सरकार की नीयत शिक्षा को बढ़ाने की नही है ,वह चाहती है कि छत्तीसगढ़ के युवा अशिक्षित रहे और गरीबी की जिल्लत भरी जीवन जिये ,
कांग्रेस पार्टी विष्णुदेव सरकार से मांग करती है कि नर्सरी,केजी,एलकेजी संचालित है उन्हें आगे भी जारी रखा जाए ,क्योकि शिक्षा ही समाज और देश को विकास के मार्ग पर ले जा सकती है,और एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है।

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