Bilaspur —वर्तमान समय में बच्चों के बढ़ते तनाव और उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों को समझने तथा एक आदर्श जीवन शैली अपनाने के उद्देश्य से, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, हेमू नगर द्वारा ‘लोटस एकेडमी’ में शिक्षकों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और व्यवहार का विज्ञान
कार्यशाला के मुख्य वक्ता बीके चिरंजीव भाई ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों के मस्तिष्क की संरचना (Brain Structure) और उसमें उत्पन्न होने वाली तरंगों के प्रभाव को बहुत ही सरल ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मानसिक विचारों के कारण मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जो बच्चों के व्यवहार में उग्रता या चिड़चिड़ापन लाते हैं। यदि शिक्षक इन वैज्ञानिक तथ्यों को समझ लें, तो वे बच्चों के व्यवहार को सकारात्मक दिशा देने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
’आर्ट ऑफ लिविंग’ के 10 सूत्र
सत्र की अगली कड़ी में बीके आरती बहन ने ‘जीवन जीने की कला’ (Art of Living) पर प्रकाश डाला। उन्होंने 10 मुख्य बिंदुओं के माध्यम से बताया कि कैसे एक शिक्षक अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाए रख सकता है। इन बिंदुओं में सकारात्मक चिंतन, धैर्य, अनुशासन और करुणा जैसे गुणों को समाहित कर जीवन को तनावमुक्त और खुशहाल बनाने के व्यावहारिक तरीके साझा किए गए।
मेडिटेशन से बढ़ेगी एकाग्रता
कार्यक्रम के अंत में बीके लता दीदी ने सभी शिक्षकों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता को भी बढ़ाता है। दीदी ने इस बात पर जोर दिया कि जब शिक्षक स्वयं आंतरिक रूप से शांत और सशक्त होंगे, तभी वे विद्यार्थियों के लिए एक रोल मॉडल बन पाएंगे।
शाला प्रबंधन ने जताया आभार
लोटस एकेडमी की प्राचार्या श्रीमती शिल्पा डांगरे एवं प्रबंधन ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में शिक्षकों के लिए ऐसे सत्र अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर स्कूल के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे, जिन्होंने इस कार्यशाला को अत्यंत लाभकारी और प्रेरक बताया

