बालोद: माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों में बालोद जिले की विदारक स्थिति ने शासन-प्रशासन के ‘शिक्षा मॉडल’ की कलई खोलकर रख दी है। जिले के एक भी छात्र का प्रावीण्य सूची (Top Ten) में स्थान न बना पाना न केवल एक सांख्यिकीय गिरावट है, बल्कि यह उस व्यवस्था की नैतिक पराजय है जो शिक्षा के नाम पर केवल आंकड़ों का मायाजाल बुनती रही है।
इस गंभीर विषय पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश संयुक्त सचिव श्री दीपक आरदे जी ने अत्यंत कड़े शब्दों में प्रशासन की आलोचना करते हुए अपना वक्तव्य जारी किया है। श्री आरदे ने इसे ‘शैक्षणिक आपातकाल’ की संज्ञा देते हुए कहा कि जिले के 2520 विद्यार्थियों का 10वीं में और 819 विद्यार्थियों का 12वीं में अनुत्तीर्ण होना जिला शिक्षा विभाग के माथे पर एक ऐसा कलंक है जिसे केवल ‘समीक्षा’ के खोखले वादों से नहीं धोया जा सकता।
“बालोद के निष्पक्ष, ईमानदार और कर्मठ पत्रकारों ने सदैव प्रहरी की भूमिका निभाते हुए शिक्षा विभाग की सड़ चुकी प्रणाली के विरुद्ध शंखनाद किया था। उन्होंने निरंतर खबरों के माध्यम से और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु आंदोलनों के जरिए शासन को सचेत किया। विडंबना देखिए कि व्यवस्था सुधारने के बजाय, छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन ने उन पत्रकारों की कलम पर अंकुश लगाने का कुत्सित प्रयास किया। षड्यंत्रपूर्वक उन पर गंभीर और निराधार आरोप मढ़े गए ताकि वे मौन हो जाएं। आज पूरा जिला उस प्रशासनिक दमन और भ्रष्टाचार की भारी कीमत चुका रहा है।” – दीपक आरदे
श्री आरदे ने शासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब पत्रकार और जागरूक नागरिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और विभाग की कार्यशैली पर प्रश्न उठा रहे थे, तब प्रशासन उनकी आवाज दबाने में व्यस्त था। आज का यह शर्मनाक परिणाम उसी ‘सत्य के दमन’ का प्रतिफल है। अधिकारी अब समीक्षा की बात कर रहे हैं, किंतु क्या वे उन हजारों बच्चों के बर्बाद हुए वर्षों और उनके मानसिक संताप की भरपाई कर पाएंगे?
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि केवल खानापूर्ति करने के बजाय, उन उत्तरदायी अधिकारियों पर तत्काल कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता से जिले को शैक्षणिक गर्त में धकेला है। श्री आरदे ने स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन नहीं हुआ और पत्रकारों के विरुद्ध प्रतिशोध की राजनीति बंद नहीं की गई, तो ‘आप’ विद्यार्थियों के हक की लड़ाई को जन-आंदोलन का रूप देगी।

