विश्व हिन्दू परिषद के तत्वावधान में उस्लापुर स्थित स्कूल में बालिकाओं के शौर्य प्रशिक्षण शिविर के दौरान भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ एवं यूनिसेफ के संयुक्त अभियान #तारुण्यवार्ता एवं #पीरियड्सपरखुलकरबात के अंतर्गत मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर विशेष सत्र आयोजित हुआ।
मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन विषय पर व्याख्यान देने पहुंचीं डॉ. पूनम सिंह, जिला संगठन आयुक्त, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स बिलासपुर ने बताया कि इस जनजागरूकता अभियान की शुरुआत 11 मई को रायपुर से हुई है। यह अभियान भारत स्काउट्स एंड गाइड्स छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य आयुक्त माननीय श्री इंद्रजीत सिंह खालसा के निर्देशानुसार चलाया जा रहा है।

डाॅ. पूनम सिंह ने मासिक धर्म स्वच्छता एवं प्रबंधन से संबंधित जानकारी देते हुए बताया कि मासिक धर्म यानी पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह किसी भी तरह की शर्म या छुपाने की बात नहीं, बल्कि महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। आज भी समाज में इससे जुड़े कई मिथक और संकोच मौजूद हैं। हमें मिलकर इन्हें तोड़ना होगा और खुलकर संवाद बढ़ाना होगा।
यह विषय केवल बच्चियों का नहीं
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विषय केवल बच्चियों तक सीमित नहीं है। समाज के लड़कों और पुरुषों को भी इस प्राकृतिक प्रक्रिया के प्रति जागरूक और संवेदनशील होना आवश्यक है। जब तक परिवार के बेटे, भाई और मित्र इस विषय को समझेंगे नहीं, तब तक बेटियाँ खुलकर अपनी परेशानी नहीं बता पाएंगी। मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं है, इसलिए इस पर बात करना अनुचित नहीं है। इसे हंसी-मजाक का विषय बनाने के बजाय सहयोग की भावना रखनी होगी। चुप्पी तोड़ें, बात शुरू करें। बेटियाँ जब अपने पिता, भाई या दोस्तों से पीरियड्स पर सहजता से बात कर सकेंगी, तभी समाज की सोच बदलेगी।

स्वास्थ्य, हाइजीन और पौष्टिक आहार
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान युग में स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। पीरियड्स के दिनों में साफ-सफाई ही पहला सुरक्षा कवच है। दिन में 2-3 बार साफ पानी से निजी अंगों की सफाई करें और हर 4-6 घंटे में पैड बदलें। गीले या गंदे कपड़े का प्रयोग संक्रमण को न्योता देता है।
मासिक धर्म के समय शरीर में आयरन की कमी होती है, इसलिए पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियाँ, गुड़-चना, अनार और दूध को भोजन में जरूर शामिल करें। जंक फूड और बहुत ठंडी चीजों से परहेज रखना बेहतर रहता है। पर्याप्त पानी पिएँ। आराम भी जरूरी है, डर नहीं। पीरियड्स के दौरान हल्का व्यायाम, योग और 8 घंटे की नींद दर्द कम करने में मदद करती है। यह बीमारी नहीं, शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है।
परिवार और समाज की भूमिका
हर बेटी और महिला को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन का अधिकार है। घर से शुरुआत जरूरी है। हर माँ-बाप का कर्तव्य है कि बेटों को भी माहवारी के बारे में संवेदनशील बनाएं। जब भाई अपनी बहन के लिए मेडिकल स्टोर से पैड लाने में झिझकेंगे नहीं, तब सही मायनों में समानता आएगी।
स्कूल-कॉलेज में सहेलियों के साथ-साथ मित्र भी इस विषय को समझें। अगर कोई सहपाठी असहज हो तो उसका मजाक नहीं, मदद करें। एक पैड, एक गिलास पानी या सिर्फ दो शब्द सहानुभूति के किसी का दिन बदल सकते हैं। स्वच्छता सम्मान है। पीरियड्स पर खुलकर बात करना असभ्यता नहीं, बल्कि जागरूकता है। जिस घर में स्वास्थ्य पर चर्चा होती है, उस घर की बेटियाँ ज्यादा आत्मविश्वास से भरी होती हैं।

हम बिलासपुर के स्काउट्स/गाइड्स, रोवर्स/रेंजर्स सभी के साथ मिलकर यह कार्य कर रहे हैं एवं अभिभावकों, शिक्षकों, युवाओं, एनजीओ और समुदाय से अपील करती हूँ कि किशोरियों को सही जानकारी दें, स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित करें और उन्हें सहयोगपूर्ण वातावरण प्रदान करें। स्कूलों में भी ऐसा सहज माहौल बनाया जाए जहाँ बच्चे स्वास्थ्य संबंधी बातों पर बिना झिझक चर्चा कर सकें।
अंत में सभी को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने की शपथ दिलाई गई। साथ ही उक्त कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता साहू द्वारा प्रशिक्षण ले रही 96 बालिकाओं एवं अन्य उपस्थित बहनों को निःशुल्क सेनेटरी पैड का वितरण किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अजय सूर्यवंशी, प्रीति दुबे, लिली सिंह ठाकुर एवं रमा शर्मा का सहयोग रहा।

