रायपुर/बिलासपुर।
धान उत्पादक किसानों के लिए खेती की बढ़ती लागत हमेशा बड़ी चुनौती रही है। खासकर यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खादों के लगातार बढ़ते उपयोग से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो खाद के संतुलित उपयोग से खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन में भी 5 से 8 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिल सकती है। वर्तमान में अधिकांश किसान प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और लगभग 1 बोरी डीएपी का उपयोग करते हैं, जिससे करीब 2000 रुपये तक खर्च आता है। वहीं 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर असर देता है। इसी तरह नैनो डीएपी के उपयोग से भी किसानों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनो खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और भूजल प्रदूषण कम करने में भी मददगार है।
प्रदेश में अब सहकारी समितियों और कृषि सेवा केंद्रों में नैनो खाद की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।

बी पी सिंह प्रदेश प्रवक्ता भाजपा किसान मोर्चा
बी पी सिंह ने कहा कि नैनो खाद खेती के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम है। इससे किसानों की लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने किसानों से नई तकनीक आधारित खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले समय में नैनो खाद खेती की लागत कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

