एरियर्स डूब रहे, सरकार खामोश,2%  डीए-डी आर पर 9 जून की कैबिनेट बैठक में फैसला जरूरी –वीरेंद्र नामदेव

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 9 जून 2026 को प्रस्तावित मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) बैठक में राज्य के कर्मचारी-अधिकारियों एवं पेंशनरों से जुड़े लंबित महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत (डीए/डीआर) के मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।

नामदेव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से स्वीकृत 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत का लाभ आज तक छत्तीसगढ़ के राज्य सेवा के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को नहीं मिल पाया है। इससे लाखों हितग्राही आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक एवं अनुचित स्थिति है कि छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों, न्यायिक सेवा के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान जनवरी 2026 से बढ़ा हुआ डीए/डीआर देने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जबकि राज्य सेवा के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को अब तक इस लाभ से वंचित रखा गया है। एक ही राज्य में समान परिस्थितियों में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त वर्गों के बीच इस प्रकार का भेदभाव न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

नामदेव ने कहा कि डीए-डीआर पर निर्णय में हो रही देरी के कारण एरियर्स की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारी एवं पेंशनर लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार द्वारा समय पर निर्णय नहीं लिए जाने से असंतोष बढ़ रहा है तथा एरियर्स का वित्तीय भार भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि 9 जून की कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार इस विसंगति को दूर करते हुए राज्य सेवा के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों के लिए जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत डीए/डीआर स्वीकृत करने तथा एरियर्स सहित भुगतान का निर्णय लेगी। इससे लाखों कर्मचारी, पेंशनर एवं उनके परिवार लाभान्वित होंगे और सरकार के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारी एवं पेंशनर हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस विषय पर संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए, जिससे सभी वर्गों को समान रूप से उनका अधिकार प्राप्त हो सके।

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